नाचा
नाचा के नाँव सुनते ही परी , जनाना अउ जोक्कड़ वाले तीन पात्र मन याद आथे जेन मन रात भर मनखे मन ल बाँध के रखय I नाच शुरु होय के पहिली उँकर मन के गाये वो गणपति वंदना मन ल हिलोर के रख दय--गाइये हो गणपति जगबन्दन शंकर सुअन भवानी जी के नंदन , पति जगबन्दन हो , पति जगबन्दन हो , गाइये हो गणपति जगबंदन I दफड़ा , दमउ , गुदुम , मोंहरी , मंजीरा , तासक ले गदक के जब संगीत ह निकलय तब वंदना के संग जोक्कड़ अउ परी के नचई ल देख मनखे मन के रोम-रोम गदगद हो जाय I उँकर बाद परी के शायरी मार-मार के नचई अउ लोगन मन अपन मनपसंद गाना के फरमाइश करें बर परी ल टार्च मारके , कोनों सीटी बजा के नइते माचिस जला के अपन तीर बुलावँय अउ मोंजरा माने पैसा देवय I परी ह जब मंच मा जाय तब एक ठिक ओकर तकिया कलाम राहय , अई बड़ नीक लागिस मोला ये चैतु के गोठ ह या , पासे मा बुलाके मोला दिस हे दू के नोट या , दूसर परी काहय अउ काय किहिस , अई ओकर फरमाइश एक गाना हे या , नचई गवई के संग गम्मत के मजा लोगन के सिर चढ़के बोलय I ते पाँय के कुछ मनखे मन मंच मेर जाके तको नोट ला फेंकय I नाचा कलाकार मन के भाव भंगिमा देखते ही बनय , जोक्क...