गुरु

 



करथे जिनगी ला उजियार I माथ नवावँव बारंबार I

कतका हे गुरु के उपकार I उही लगाथे भव के पार II

बाँटय चेला मन ला ज्ञान I मूरख तको बनय विद्वान I

जिनगी सुग्घर वो सिरजाय I नेक राह ला धरव बताय II

खुलय ज्ञान के सबो कपाट I दमके सुग्घर उँकर ललाट I

गुरुवर के जे मानय बात I बइरी मन खा जावय मात II

अड़चन अलहन देवय टार Iबोली-भाखा अमरित धार I

ज्ञान-दान के वोहर खान I गुरु ला देवव गा सम्मान II

गुरु ले बड़का हावय कोन I पथरा ला करदय वो सोन I

हरथे मन के सबो विकार I जिनगी सुग्घर देय सँवार II

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