फलसफ़ा
जिंदगी कहाँ मिलेगी अब
दोबारा I
क्यों नशे में डूब गए बेमौत मरने को I
पैर से अपाहिज असक्त कमजोर हो I
गए क्यों थे तुम सीढियां
उतरने को I
जब बात किसी की धरते ही
नहीं हो I
जाते क्यों हो ज्ञानी के संगत करने को I
मरज ला इलाज है ये तो मालूम है तुम्हे I
फिर जिंदगी में रह क्या
गया अखरने को I
जितनी बड़ी चादर है उतना
पैर पसारो I
मुसीबत में कौन आएगा जख्म
भरने को I
सदा समय के साथ चलने में
ही है भलाई I
क्या जरूरत है दिखावा कर
उभरने को I
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