रिश्तों की डोर को बाँधे रखिये
रिश्तों की डोर को अच्छे से बाँधे रखिये,
मुसीबतों में आखिर अपने ही काम आते है I
उड़ना है आसमान में तो हवा से क्या डरना,
डोर कमजोर सही पतंग हवा के रुख में उड़ाते हैं I
जिंदगी का सफर कब खत्म हो जाय किसे मालूम,
अपने होठों पे न सही ओरो के होठों पे खुशियाँ
लाते है I
भरोसा उन पर कभी मत करना दोस्तों,
जो छोटी बातों का सदा बतंगड बनाते हैं I
सुख दुख में बरसते हैं जहाँ नैनन में आंसू,
वहीं घर तो खुशियों से ही खिलखिलाते हैं I
हवा में घुल चुके हैं अजीबो किस्म के रंग,
मौसम के पाला बदलते ही साफ़ नजर आते हैं I
विवशता विफलता विकलता धरके क्यों बैठे,
अभिलाषा लिए मन को ही आज जगाते हैंI
एकता के फायदे बस किताबो में ही क्यों पढ़ना,
लोकाचार लोकव्यवहार आदत में सुमार कराते हैंI
सजावट मिलावट दिखावट का आया जमाना,
आडंबर छोड़ चलो आओ खरा सोना बन जाते हैं I
विजेंद्र कुमार वर्मा
नगरगाँव (धरसीवां)
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